श्री हनुमान जी - वानररूपधारी, रामभक्त, संकटमोचन, बजरंगबली। हनुमान जी भगवान शिव के 11वें रुद्रावतार हैं और भगवान राम के परम भक्त हैं। इन्हें पवनपुत्र भी कहा जाता है क्योंकि इनकी माता अंजनी और पिता वायुदेव (पवन) हैं।
हनुमान जी भक्ति और शक्ति का अद्वितीय संगम हैं। नौ प्रकार की भक्तियों में से "दास्य भक्ति" के प्रतीक हैं। इनकी भक्ति से भक्त को शक्ति, बुद्धि, विद्या और निर्भयता प्राप्त होती है। हनुमान चालीसा का पाठ सभी प्रकार के संकटों को दूर करता है।
"संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।"
— श्री हनुमान चालीसा
हनुमान जी के गुण और विशेषताएँ
संकट मोचन
सभी प्रकार के संकटों और बाधाओं को दूर करने वाले, भक्तों के रक्षक
नवविद्या के ज्ञाता
नौ प्रकार की विद्याओं में पारंगत, बुद्धि और ज्ञान के दाता
अष्ट सिद्धि के स्वामी
आठों सिद्धियों और नौ निधियों के स्वामी, अतुलित बलशाली
रामभक्त
भगवान राम के परम भक्त, सेवा और समर्पण के प्रतीक
हनुमान चालीसा
हनुमान चालीसा का पहला दोहा
बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥
हनुमान भक्ति संसाधन
हनुमान चालीसा
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित 40 चौपाइयों का पवित्र ग्रंथ। सभी संकटों को दूर करने वाला।
बजरंग बाण
हनुमान जी का शक्तिशाली स्तोत्र। शत्रु बाधा निवारण और विजय के लिए उपयोगी।
सुंदरकांड
रामचरितमानस का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय। हनुमान जी की लंका यात्रा का वर्णन।
हनुमान आरती
हनुमान जी की आरती। प्रतिदिन संध्या समय करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है।
हनुमान मंत्र
हनुमान बीज मंत्र
बीज मंत्रहनुमान जी का मूल बीज मंत्र। सभी प्रकार की सिद्धियों के लिए उपयोगी।
संकट मोचन मंत्र
रक्षा मंत्रसंकटों को दूर करने वाला शक्तिशाली मंत्र। तंत्र साधना में प्रयोग।
हनुमान कवच
कवच स्तोत्रहनुमान जी का कवच स्तोत्र। नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा प्रदान करता है।
हनुमान भजन प्लेलिस्ट
हनुमान जी के भजनों की विशेष प्लेलिस्ट। एक बार प्ले करें और 2 घंटे तक निर्बाध भजन सुनें।
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पूरी प्लेलिस्ट देखेंहनुमान पूजा विधि
- हनुमान जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें
- लाल चुनरी अवश्य चढ़ाएं
- हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करें
- संकट में 108 बार "ॐ हनुमते नमः" जपें
- प्रसाद बाँट कर ही स्वयं ग्रहण करें
हनुमान भक्ति के लाभ
- संकट निवारण: सभी प्रकार के संकट और बाधाएँ दूर होती हैं
- शक्ति प्राप्ति: शारीरिक और मानसिक शक्ति में वृद्धि
- भय मुक्ति: भूत-प्रेत, तंत्र-मंत्र के भय से मुक्ति
- रोग निवारण: गंभीर रोगों से मुक्ति मिलती है
- शत्रु पराजय: शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है
- आत्मविश्वास: आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि