हनुमान चालीसा

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित 40 चौपाइयों का पवित्र ग्रंथ - पूरा पाठ, अर्थ, लाभ और विधि

हनुमान चालीसा गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है जिसमें 40 चौपाइयों (दोहों) के माध्यम से हनुमान जी की महिमा, गुण और कृपा का वर्णन किया गया है। यह हिंदू धर्म के सबसे लोकप्रिय और प्रभावशाली भक्ति ग्रंथों में से एक है।

हनुमान चालीसा का महत्व

हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करने से सभी प्रकार के संकट दूर होते हैं, शत्रुओं पर विजय मिलती है, और मन को शांति प्राप्त होती है। यह न केवल आध्यात्मिक बल्कि मानसिक और शारीरिक लाभ भी प्रदान करता है।

"संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।"

— हनुमान चालीसा (दोहा 25)

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हनुमान चालीसा - पूरा पाठ (10 मिनट)

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित हनुमान चालीसा का मधुर स्वर में पाठ। सभी 40 चौपाइयों का संपूर्ण पाठ।

मन की शांति - SKY
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हनुमान चालीसा - पूरा पाठ (40 चौपाइयाँ)

श्री हनुमान चालीसा

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥
अर्थ
श्री गुरु के चरण कमलों की धूल को, अपने मन रूपी दर्पण में धारण करके, मैं श्री रघुनाथजी के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो चारों फल (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) देने वाले हैं।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवनकुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥
अर्थ
हे पवनपुत्र! मैं अपने आपको बुद्धिहीन जानकर आपका स्मरण करता हूँ। आप मुझे बल, बुद्धि और विद्या प्रदान करें और मेरे सब दुःखों व विकारों को हर लें।
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥
अर्थ
हे ज्ञान और गुणों के सागर हनुमान जी की जय हो। हे कपीश्वर (वानरों के स्वामी) आपकी जय हो, आप तीनों लोकों में प्रसिद्ध हैं।
रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥
अर्थ
आप श्री राम के दूत, अतुलित बल के धाम, अंजनी पुत्र और पवनपुत्र नाम से विख्यात हैं।
महावीर विक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥
अर्थ
हे महावीर, विक्रमशाली, बजरंगबली! आप कुमति (बुरी बुद्धि) को नष्ट करने वाले और सुमति (अच्छी बुद्धि) के साथी हैं।
कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा॥
अर्थ
आपका शरीर सोने के समान चमकीला और सुंदर वेश है। आपके कानों में कुंडल और सिर पर घुंघराले केश हैं।
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। काँधे मूँज जनेऊ साजै॥
अर्थ
आपके हाथ में वज्र (गदा) और ध्वजा शोभायमान है। कंधे पर मूंज की जनेऊ सुशोभित है।
शंकर सुवन केसरी नंदन। तेज प्रताप महा जग बंदन॥
अर्थ
आप भगवान शंकर के अवतार और केसरी के पुत्र हैं। आपके तेज और प्रताप से संपूर्ण संसार आपकी वंदना करता है।
विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥
अर्थ
आप विद्यावान, गुणवान, अत्यंत चतुर और श्री राम के कार्यों को करने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।
१०
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥
अर्थ
आप प्रभु श्री राम के चरित्र को सुनने में रसिक हैं। श्री राम, लक्ष्मण और सीता जी आपके हृदय में निवास करते हैं।
११
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा॥
अर्थ
आपने सूक्ष्म रूप धारण कर सीता जी को दर्शन दिए और विशाल रूप धारण कर लंका को जलाया।
१२
भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज संवारे॥
अर्थ
आपने भीम रूप धारण कर राक्षसों का संहार किया और श्री रामचंद्र जी के कार्यों को सफल बनाया।
१३
लाय संजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥
अर्थ
आप संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी को जीवित किया, जिससे श्री रघुवीर (राम जी) ने आपको हृदय से लगा लिया।
१४
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥
अर्थ
श्री रघुपति (राम जी) ने आपकी बहुत प्रशंसा की और कहा: तुम मेरे प्रिय हो, भरत के समान भाई हो।
१५
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥
अर्थ
हजारों मुख आपकी यशगाथा गाते हैं, ऐसा कहकर श्री राम जी ने आपको अपने हृदय से लगा लिया।
१६
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥
अर्थ
सनक आदि ऋषि, ब्रह्मा आदि देवता, मुनिगण, नारद, सरस्वती और शेषनाग सहित सभी।
१७
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते। कबि कोबिद कहि सकैं कहाँ ते॥
अर्थ
यम, कुबेर, दिग्पाल आदि सब और कवि व विद्वान भी आपकी महिमा का पूर्ण वर्णन नहीं कर सकते।
१८
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा॥
अर्थ
आपने सुग्रीव पर उपकार किया, उनकी श्री राम से मित्रता करवाई और उन्हें राज्य प्रदान किया।
१९
तुम्हरो मंत्र विभीषण माना। लंकेश्वर भए सब जग जाना॥
अर्थ
आपके मंत्र को विभीषण ने माना, जिससे वह लंका का राजा बना, यह सारा संसार जानता है।
२०
जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥
अर्थ
हजारों योजन दूर स्थित सूर्य को आपने मधुर फल समझकर निगल लिया।
२१
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गये अचरज नाहीं॥
अर्थ
प्रभु की अंगूठी मुख में रखकर समुद्र लांघ गए, यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है।
२२
दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥
अर्थ
संसार के जितने भी दुर्गम कार्य हैं, वे सब आपकी कृपा से सुगम हो जाते हैं।
२३
राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥
अर्थ
आप श्री राम के द्वार के रखवाले हैं, आपकी आज्ञा के बिना कोई भीतर नहीं जा सकता।
२४
सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥
अर्थ
आपकी शरण में आने वाले को सभी सुख प्राप्त होते हैं और आप रक्षक होने के कारण किसी का भय नहीं रहता।
२५
आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हांक तें कांपै॥
अर्थ
आप अपने तेज को स्वयं संभालते हैं, आपकी हांक से तीनों लोक कांपते हैं।
२६
भूत पिशाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै॥
अर्थ
भूत-पिशाच आपके नाम का उच्चारण सुनकर पास नहीं आते।
२७
नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥
अर्थ
हे वीर हनुमान! आपके नाम का निरंतर जप करने से सभी रोग और पीड़ाएँ नष्ट हो जाती हैं।
२८
संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥
अर्थ
जो व्यक्ति मन, कर्म और वचन से हनुमान जी का ध्यान करता है, हनुमान जी उसे सभी संकटों से मुक्त कर देते हैं।
२९
सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा॥
अर्थ
सबसे श्रेष्ठ तपस्वी राजा श्री राम के सभी कार्यों को आपने सफल बनाया।
३०
और मनोरथ जो कोई लावै। सोई अमित जीवन फल पावै॥
अर्थ
और जो कोई अन्य मनोरथ (इच्छा) लेकर आता है, वह भी अमृत के समान फल प्राप्त करता है।
३१
चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥
अर्थ
चारों युगों में आपका प्रताप है और आपकी कीर्ति से संपूर्ण जगत प्रकाशित है।
३२
साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे॥
अर्थ
आप साधु-संतों के रक्षक और राक्षसों के संहार करने वाले श्री राम के दुलारे हैं।
३३
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥
अर्थ
आप आठ सिद्धियों और नौ निधियों के दाता हैं, ऐसा वरदान जानकी माता (सीता जी) ने दिया है।
३४
राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥
अर्थ
श्री राम-नाम-रूपी अमृत आपके पास है, आप सदा रघुपति के दास बने रहें।
३५
तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै॥
अर्थ
आपके भजन से श्री राम की प्राप्ति होती है और जन्म-जन्मांतर के दुख भूल जाते हैं।
३६
अंत काल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥
अर्थ
अंत समय में रघुबर (श्री राम) के धाम को जाते हैं और वहाँ जन्म लेकर हरिभक्त कहलाते हैं।
३७
और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेई सर्व सुख करई॥
अर्थ
अन्य देवताओं का चिंतन न करके हनुमान जी का चिंतन करने से सभी सुख प्राप्त होते हैं।
३८
संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥
अर्थ
जो हनुमत बलबीरा का स्मरण करता है, उसके सभी संकट कट जाते हैं और सभी पीड़ाएँ मिट जाती हैं।
३९
जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥
अर्थ
जय-जय-जय हे हनुमान गोसाईं! गुरुदेव की तरह मुझ पर कृपा करें।
४०
जो शत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई॥
अर्थ
जो कोई सौ बार इसका पाठ करता है, वह सभी बंधनों से मुक्त होकर महान सुख प्राप्त करता है।
दोहा
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥
अर्थ
हे पवनपुत्र संकटहरण! हे मंगलमूर्ति! आप श्री राम, लक्ष्मण और सीता जी सहित मेरे हृदय में निवास करें।

यह है पूरी हनुमान चालीसा - सभी 40 चौपाइयाँ और अंतिम दोहा

हनुमान चालीसा पाठ के लाभ

संकट निवारण

सभी प्रकार के संकट, बाधाएँ और समस्याएँ दूर होती हैं।

बुद्धि वर्धन

बुद्धि, स्मरण शक्ति और विद्या में वृद्धि होती है।

स्वास्थ्य लाभ

शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।

मानसिक शांति

मन की अशांति दूर होकर शांति और स्थिरता मिलती है।

हनुमान चालीसा पाठ विधि

चरण 1
स्नान और शुद्धि
स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। आसन पर बैठें।
चरण 2
ध्यान और संकल्प
हनुमान जी का ध्यान करें और पाठ का संकल्प लें।
चरण 3
पाठ प्रारंभ
श्री गणेश जी का स्मरण करके चालीसा पाठ प्रारंभ करें।
चरण 4
आरती और प्रसाद
पाठ के बाद हनुमान आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
विशेष सलाह:
  • मंगलवार और शनिवार का दिन विशेष फलदायी है
  • प्रातः 4-6 बजे (ब्रह्म मुहूर्त) सबसे श्रेष्ठ समय है
  • लाल वस्त्र धारण करके पाठ करें
  • सिंदूर और लाल फूल चढ़ाएँ
  • नियमित रूप से प्रतिदिन पाठ करने से अधिक लाभ मिलता है

हनुमान चालीसा से जुड़े प्रश्न (FAQ)

हनुमान चालीसा किसने लिखी?

हनुमान चालीसा गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा 16वीं शताब्दी में लिखी गई थी। तुलसीदास जी रामचरितमानस के भी रचयिता हैं और भगवान राम के परम भक्त थे।

हनुमान चालीसा पाठ करने का सबसे अच्छा समय क्या है?

हनुमान चालीसा पाठ करने का सबसे अच्छा समय प्रातः ब्रह्म मुहूर्त (4-6 बजे) है। इसके अलावा मंगलवार और शनिवार का दिन विशेष रूप से शुभ माना जाता है। संध्या समय (सूर्यास्त के बाद) भी उपयुक्त है।

हनुमान चालीसा पढ़ने से क्या लाभ मिलते हैं?

हनुमान चालीसा पाठ के अनेक लाभ हैं: संकटों से मुक्ति, शत्रु बाधा निवारण, मानसिक शांति, आत्मविश्वास में वृद्धि, स्वास्थ्य लाभ, बुद्धि और स्मरण शक्ति में वृद्धि, नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा, और आध्यात्मिक प्रगति।

हनुमान चालीसा कितनी बार पढ़नी चाहिए?

नियमित रूप से प्रतिदिन 1 बार हनुमान चालीसा पाठ करना पर्याप्त है। विशेष संकट की स्थिति में 11, 21, 51 या 108 बार पाठ करने की सलाह दी जाती है। मंगलवार को 11 बार पाठ विशेष फलदायी माना जाता है।

क्या हनुमान चालीसा का पाठ महिलाएं कर सकती हैं?

हाँ, हनुमान चालीसा का पाठ कोई भी कर सकता है - पुरुष, महिला, बच्चे, बुजुर्ग। हनुमान जी सभी भक्तों पर समान रूप से कृपा करते हैं। केवल मासिक धर्म के दौरान कुछ परंपराओं में पाठ से बचने की सलाह दी जाती है, लेकिन यह व्यक्तिगत विश्वास पर निर्भर है।

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