पूजा विधि - सही पूजा करने की संपूर्ण गाइड

दैनिक पूजा से लेकर विशेष पूजा तक की पूरी जानकारी। पूजा सामग्री, मंत्र, विधिवत पूजन और पूजा के नियम।

पूजा संस्कृत शब्द 'पूज्' धातु से बना है, जिसका अर्थ है - सम्मान करना, आदर करना। पूजा भगवान के प्रति हमारी श्रद्धा, प्रेम और समर्पण की अभिव्यक्ति है। सही विधि से की गई पूजा हमें मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और भगवान की कृपा प्रदान करती है।

पूजा का महत्व

पूजा न केवल आध्यात्मिक बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। पूजा के दौरान जलाए जाने वाले धूप, दीपक और अगरबत्ती वातावरण को शुद्ध करते हैं। मंत्रों का उच्चारण सकारात्मक ऊर्जा फैलाता है और मन को शांत करता है। नियमित पूजा से आत्मसंयम, अनुशासन और एकाग्रता बढ़ती है।

पूजा की मूलभूत सामग्री

आवश्यक पूजा सामग्री

एक सामान्य पूजा के लिए निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होती है:

जल
शुद्ध जल, कलश के लिए
दीपक
घी या तेल का दीपक
पुष्प
ताजे फूल, बेलपत्र
फल
मीठे फल, नारियल
अक्षत
चावल (अखंड)
प्रसाद
मिठाई, पंचामृत
धूप
अगरबत्ती, धूपबत्ती
चंदन
चंदन पेस्ट या पाउडर

टिप: यदि सभी सामग्री उपलब्ध न हों, तो शुद्ध जल, फूल और दीपक से भी पूजा की जा सकती है। भावना सबसे महत्वपूर्ण है।

पूजा का सही समय

समय मुहूर्त लाभ उपयुक्तता
प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त (4-6 बजे) मन शांत, वातावरण पवित्र सर्वोत्तम
सूर्योदय प्रातः 6-8 बजे दिन की शुभ शुरुआत बहुत अच्छा
संध्या सूर्यास्त से पहले दिनभर की थकान दूर अच्छा
रात्रि सोने से पहले शांतिपूर्ण निद्रा उपयुक्त
"पूजा का सबसे उत्तम समय ब्रह्म मुहूर्त है। इस समय वातावरण में सात्विकता की मात्रा सबसे अधिक होती है और मन एकाग्र होता है।"

पूजा की स्टेप-बाय-स्टेप विधि

1

शुद्धि और आसन

स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को साफ करें। आसन (चटाई/कुशा) बिछाएं। पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।

ॐ आपो हि ष्ठा मयोभुवस्ता न ऊर्जे दधातन

मंत्र अर्थ: हे जल देवता, आप हमें शक्ति और सुख प्रदान करें।

2

संकल्प

पूजा का संकल्प लें। हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर अपना नाम, गोत्र, तिथि और उद्देश्य बताते हुए संकल्प लें।

मम उपात्त समस्त दुरितक्षयद्वारा श्रीपरमेश्वर प्रीत्यर्थं पूजां करिष्ये

मंत्र अर्थ: मैं अपने सभी पापों के नाश के लिए और भगवान को प्रसन्न करने के लिए पूजा करूंगा।

3

आसन शुद्धि

आसन पर जल छिड़क कर शुद्ध करें। हाथ में जल लेकर निम्न मंत्र बोलें:

ॐ पृथिव्यै नमः (जल छिड़कें)

इसी प्रकार आकाश, वायु, अग्नि और जल के लिए मंत्र बोलें।

4

कलश स्थापना

कलश में जल भरकर उसमें सिक्का, दूर्वा और आम के पत्ते डालें। कलश पर नारियल रखें।

ॐ गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती, नर्मदे सिन्धु कावेरी जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु

मंत्र अर्थ: हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिंधु और कावेरी नदियों, इस जल में आप सभी का वास हो।

5

दीप प्रज्वलन

दीपक जलाएं। दीपक भगवान के ज्ञान का प्रतीक है जो अज्ञान के अंधकार को दूर करता है।

ॐ दीपज्योतिः परब्रह्म दीपज्योतिर्जनार्दनः, दीपो हरतु मे पापं दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते

मंत्र अर्थ: दीपक का प्रकाश परब्रह्म है, यह मेरे पापों को हर ले, मैं दीपक के प्रकाश को नमन करता हूँ।

6

धूप दर्शन

धूप जलाएं और भगवान को अर्पित करें। धूप वातावरण को शुद्ध करती है और भगवान तक हमारी प्रार्थना पहुँचाती है।

ॐ धूपमग्रे प्रतिगृह्यतां धूपमग्रे प्रतिगृह्यताम्
7

पुष्प अर्पण

फूल भगवान को अर्पित करें। फूल पवित्रता और प्रेम का प्रतीक हैं।

ॐ पुष्पैः पूज्यामि, नमः

नोट: तुलसी के पत्ते विष्णु जी को, दूर्वा गणेश जी को, बेलपत्र शिव जी को विशेष रूप से अर्पित किए जाते हैं।

8

नैवेद्य

भगवान को भोग लगाएं। फल, मिठाई या पकवान अर्पित करें।

ॐ नैवेद्यं समर्पयामि, स्वीकुरुष्व मम प्रभो

मंत्र अर्थ: हे प्रभु, मैं आपको भोग अर्पित करता हूँ, कृपया स्वीकार करें।

9

आरती

दीपक लेकर भगवान की आरती करें। आरती भगवान के प्रति हमारे समर्पण का प्रतीक है।

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे...

आरती के बाद हाथों को आरती के ऊपर से ले जाएं और अपने सिर पर फेरें।

10

प्रदक्षिणा और प्रणाम

भगवान की प्रदक्षिणा (परिक्रमा) करें और प्रणाम करें।

करचरणकृतं वाक्कायजं कर्मजं वा, श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधम्। विहितमविहितं वा सर्वमेतत्क्षमास्व, जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो॥

मंत्र अर्थ: हे महादेव, मेरे हाथों, पैरों, वाणी, शरीर, कर्म, कानों, आँखों और मन से हुए सभी जाने-अनजाने अपराधों को क्षमा करें।

विभिन्न प्रकार की पूजाएं

दैनिक पूजा

प्रतिदिन की जाने वाली सरल पूजा, 15-20 मिनट में पूरी होती है।

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विशेष पूजा

त्योहारों और विशेष अवसरों पर की जाने वाली विस्तृत पूजा।

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हवन/यज्ञ

अग्नि में आहुति देकर की जाने वाली वैदिक पूजा विधि।

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पूजा के महत्वपूर्ण नियम

  • शुद्धता: पूजा से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • भावना: पूजा में भावना सबसे महत्वपूर्ण है, बाह्य आडंबर नहीं।
  • नियमितता: नियमित रूप से पूजा करें, भले ही संक्षिप्त हो।
  • समर्पण: पूजा पूरे मन से करें, व्यवधान से बचें।
  • प्रसाद वितरण: पूजा का प्रसाद सभी को बाँटें, स्वयं अंत में ग्रहण करें।
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