आरती हिंदू धर्म में पूजा का एक महत्वपूर्ण अंग है। यह भगवान के प्रति हमारी श्रद्धा, प्रेम और कृतज्ञता को प्रकट करने का सबसे सुंदर माध्यम है। दीपक की लौ के साथ गाई जाने वाली आरती न केवल वातावरण को पवित्र करती है, बल्कि मन को भी शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है।
आरती का शाब्दिक अर्थ है - 'अंधकार को दूर करना'। आरती के दौरान दीपक की लहराती हुई लौ भगवान के दिव्य स्वरूप का दर्शन कराती है। यह हमें सिखाती है कि हमारा जीवन भी इस दीपक की तरह होना चाहिए - जलते हुए दूसरों को प्रकाश देना। आरती में उपयोग किए जाने वाले पंचोपचार (धूप, दीप, गंध, पुष्प, नैवेद्य) पंच तत्वों का प्रतीक हैं।
प्रमुख देवी-देवताओं की आरतियाँ
श्री गणेश आरती
गणपति, विघ्नहर्तामाता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा॥
एकदन्त दयावन्त, चार भुजा धारी।
मस्तक सिन्दूर सोहे, मूसे की सवारी॥
जय गणेश...
अन्धन को आँख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
जय गणेश...
श्री लक्ष्मी आरती
धन की देवी, समृद्धितुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु धाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता...
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता...
दुर्गा रूप निरंजन, सुख-सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता...
शिव आरती
महादेव, भोलेनाथब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
ॐ जय शिव ओंकारा...
एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।
हंसासन गरूड़ासन, वृषवाहन साजे॥
ॐ जय शिव ओंकारा...
दो भुज चार चतुर्भुज, दस भुज अति सोहे।
तीनों रूप निरखता, त्रिभुवन जन मोहे॥
ॐ जय शिव ओंकारा...
दुर्गा आरती
आदि शक्ति, नवदुर्गातुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवाजी॥
जय अम्बे गौरी...
मांग सिन्दूर बिराजत, टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको॥
जय अम्बे गौरी...
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजे।
रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजे॥
जय अम्बे गौरी...
विष्णु आरती
नारायण, पालनहारभक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट,
क्षण में दूर करे॥ ॐ जय जगदीश हरे॥
जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिन से मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
ॐ जय जगदीश हरे...
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी॥
ॐ जय जगदीश हरे...
हनुमान आरती
बजरंगबली, संकटमोचनजाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके॥
आरती कीजै...
अंजनि पुत्र महा बलदाई। संतन के प्रभु सदा सहाई॥
दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारि सिया सुधि लाए॥
आरती कीजै...
लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई॥
लंका जारि असुर संहारे। सियारामजी के काज सवारे॥
आरती कीजै...
आरती का सही समय और विधि
| आरती का समय | महत्व | विशेष देवता |
|---|---|---|
| प्रातः काल (सूर्योदय से पूर्व) | दिन की शुरुआत, सकारात्मक ऊर्जा का संचार | गणेश, सूर्य, विष्णु |
| मध्याह्न (दोपहर 12 बजे) | भगवान को भोग लगाने से पूर्व | सभी देवी-देवता |
| सायंकाल (सूर्यास्त के समय) | दिनचर्या से निवृत्त होकर, संध्या समय | शिव, दुर्गा, हनुमान |
| रात्रि (शयन से पूर्व) | दिन के समापन पर शांति और सुरक्षा हेतु | लक्ष्मी, विष्णु |
"आरती करते समय दीपक को भगवान के चरणों से प्रारंभ करके धीरे-धीरे सिर तक ले जाएं। आरती के बाद अपने हाथों को दीपक के ऊपर से ले जाकर अपनी आंखों और सिर पर रखें। ऐसा माना जाता है कि इससे भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है।"
आरती सामग्री
- दीपक: पीतल या तांबे का दीपक, घी या तेल, बाती
- धूप/अगरबत्ती: वातावरण को शुद्ध करने के लिए
- घंटी: आरती के दौरान घंटी बजाने से वातावरण में सकारात्मक कंपन उत्पन्न होते हैं
- फूल: चढ़ाने के लिए ताजे फूल
- चंदन या रोली: तिलक के लिए
आरती के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें
- शुद्धता: आरती से पूर्व स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- भावना: आरती करते समय पूरा ध्यान भगवान के स्वरूप में लगाएं।
- घंटी: आरती प्रारंभ करने से पहले घंटी अवश्य बजाएं।
- प्रसाद: आरती के बाद प्रसाद वितरित करें।
- मौन: आरती के समय यथासंभव मौन रहें या आरती में सम्मिलित हों।
आरती का आध्यात्मिक महत्व
आरती केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं है, बल्कि यह हमारे भीतर की नकारात्मकता को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। दीपक की लौ हमें सिखाती है कि हमारा जीवन भी परोपकार के लिए होना चाहिए। आरती के समय बजने वाली घंटी की ध्वनि मन की चंचलता को शांत कर एकाग्रता बढ़ाती है।
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