शिव तांडव स्तोत्र भगवान शिव के तांडव नृत्य का वर्णन करने वाला एक अत्यंत शक्तिशाली स्तोत्र है। इसकी रचना लंकापति रावण ने की थी। कहा जाता है कि रावण ने अपनी दसों मुखों से शिव तांडव स्तोत्र का गान किया था, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अमोघ वरदान दिए थे। इस स्तोत्र में 16 श्लोक हैं जो शिव के रौद्र रूप, उनके तांडव नृत्य और उनकी दिव्यता का अद्भुत वर्णन करते हैं।
गलेऽवलम्ब्य लम्बिताम् भुजंगतुंग मालिकाम् |
"जिनकी जटाओं से गंगा प्रवाहित हो रही है, जिनके गले में सर्पों की माला विराजमान है..."
श्री शिव तांडव स्तोत्र
शिव तांडव स्तोत्र का अर्थ (मुख्य श्लोक)
पूरे स्तोत्र का विस्तृत अर्थ जल्द ही...
रावण और शिव तांडव स्तोत्र की कथा
रावण ने कैलाश पर्वत को ही उठा लिया था। तब भगवान शिव ने अपने पैर के अंगूठे से पर्वत को दबा दिया, जिससे रावण की दसों भुजाएं दब गईं।
पीड़ा से व्याकुल रावण ने अपनी दसों मुखों से शिव की स्तुति प्रारंभ की। उसने एक-एक करके 16 श्लोकों का गान किया, जो शिव तांडव स्तोत्र के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
स्तोत्र से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने रावण को चंद्रहास नामक अमोघ खड्ग और अजेय होने का वरदान दिया।
शिव तांडव स्तोत्र के लाभ
भय मुक्ति
इस स्तोत्र के पाठ से सभी प्रकार के भय दूर होते हैं। शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है।
ऊर्जा और शक्ति
शिव तांडव स्तोत्र का पाठ शरीर में अपार ऊर्जा का संचार करता है। आत्मविश्वास बढ़ता है।
मानसिक बल
मानसिक दुर्बलता दूर होती है। निर्णय क्षमता और इच्छाशक्ति प्रबल होती है।
आध्यात्मिक उन्नति
नियमित पाठ से आध्यात्मिक ऊर्जा जागृत होती है और साधना में गति मिलती है।
शिव तांडव स्तोत्र वीडियो
शिव तांडव स्तोत्र - रावण रचित
शक्तिशाली शिव तांडव स्तोत्र का मधुर गायन। भगवान शिव के तांडव नृत्य का दिव्य वर्णन।
शिव तांडव स्तोत्र से जुड़े प्रश्न (FAQ)
प्रातः काल स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान शिव का ध्यान करें। शिव तांडव स्तोत्र का शुद्ध उच्चारण के साथ पाठ करें। सोमवार और शिवरात्रि का विशेष महत्व है।
हाँ, शिव तांडव स्तोत्र किसी भी समय पढ़ा जा सकता है। रात्रि के समय इसका पाठ विशेष फलदायी माना जाता है क्योंकि यह समय शिव की उपासना के लिए उत्तम है।
शिव तांडव स्तोत्र 16 श्लोकों का है। कुछ संस्करणों में 17 या 18 श्लोक भी मिलते हैं, लेकिन मूल स्तोत्र 16 श्लोकों का ही माना जाता है।
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