शिव आरती भगवान शिव को प्रसन्न करने की सबसे सरल और सुंदर विधि है। "ॐ जय शिव ओंकारा" से प्रारंभ होने वाली यह आरती प्रतिदिन संध्या समय करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है। शिव आरती में भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों का वर्णन है और इसे गाने से मन को अद्भुत शांति मिलती है।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥
"जय हो शिव ओंकार स्वामी जय हो शिव ओंकार। ब्रह्मा, विष्णु और सदाशिव तीनों स्वरूपों को धारण करने वाले।"
ॐ जय शिव ओंकारा
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
हंसासन गरुड़ासन, वृषवाहन साजे॥
तीनों रूप निरखता, त्रिभुवन मन मोहे॥
चंदन मृगमद सोहै, भाले शशि विहारी॥
सनकादिक ब्रह्मादिक, भूतादिक संगे॥
जगकर्ता जगहर्ता, जगपालनकर्ता॥
प्रणवाक्षर के मध्ये, ये तीनों एका॥
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावै॥
शिव आरती का अर्थ (मुख्य पंक्तियाँ)
शिव आरती विधि
शिव आरती के लिए आवश्यक सामग्री
शिव आरती के लाभ
गृह कलह शांति
नियमित शिव आरती करने से घर के कलह दूर होते हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति
आरती की लौ और ध्वनि से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है। वास्तु दोष दूर होते हैं।
मानसिक शांति
आरती के समय मन एकाग्र होता है। तनाव और चिंता दूर होकर मानसिक शांति मिलती है।
मनोकामना पूर्ति
सच्चे मन से शिव आरती करने से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
शिव आरती वीडियो
शिव आरती - ॐ जय शिव ओंकारा
भगवान शिव की पवित्र आरती। प्रतिदिन संध्या समय सुनने से घर में सुख-शांति बनी रहती है।
शिव आरती से जुड़े प्रश्न (FAQ)
शिव आरती का सबसे उत्तम समय संध्या काल (सूर्यास्त के समय) है। सोमवार और महाशिवरात्रि के दिन इसका विशेष महत्व है। प्रातः काल भी आरती की जा सकती है।
शिव आरती में जल, दूध, दही, घी, शहद, बेलपत्र, धतूरा, भांग, चंदन, अक्षत, फूल और भस्म चढ़ाई जाती है। कपूर या घी का दीपक अवश्य जलाएं।
हाँ, शिव आरती कोई भी पुरुष या महिला कर सकते हैं। भगवान शिव सभी भक्तों पर समान कृपा करते हैं। मासिक धर्म के दौरान कुछ लोग आरती नहीं करते, लेकिन यह व्यक्तिगत आस्था का विषय है।
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