वैदिक मंत्र

ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद के प्राचीन मंत्र, वैदिक संस्कृत में उच्चारण, अर्थ और साधना विधि।

वैदिक मंत्र मानव सभ्यता के सबसे प्राचीन और शक्तिशाली मंत्र हैं। ये मंत्र ऋषियों द्वारा गहन ध्यान की अवस्था में प्राप्त किए गए थे और इन्हें "श्रुति" कहा जाता है, जिसका अर्थ है "सुना हुआ"। वैदिक मंत्रों का उच्चारण केवल शब्द नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय ऊर्जा को आह्वान करना है।

वैदिक मंत्रों का महत्व

वैदिक मंत्र केवल प्रार्थना नहीं, बल्कि वैज्ञानिक सूत्र हैं। इनके उच्चारण से उत्पन्न ध्वनि तरंगें वातावरण को शुद्ध करती हैं, मन को शांत करती हैं और शरीर के ऊर्जा चक्रों को सक्रिय करती हैं। नासा के वैज्ञानिकों ने भी माना है कि वैदिक मंत्रों की ध्वनि तरंगें ब्रह्मांड की मूल ध्वनि से मेल खाती हैं।

"वेदों में संपूर्ण ब्रह्मांड का ज्ञान समाहित है। वैदिक मंत्र वह कुंजी हैं जो दिव्य ऊर्जा के द्वार खोलते हैं।"

— महर्षि दयानन्द सरस्वती

चार वेद और उनके मंत्र

ऋग्वेद

ज्ञान का वेद। सबसे प्राचीन वेद जिसमें 10,552 मंत्र हैं। इसमें प्रकृति, देवताओं और ब्रह्मांड के रहस्यों का वर्णन है।

10,552
मंत्र
10
मण्डल

यजुर्वेद

कर्म का वेद। यज्ञ और अनुष्ठानों के लिए मंत्र। इसमें गद्य और पद्य दोनों रूपों में मंत्र हैं। यज्ञ विधि का विस्तृत वर्णन।

1,975
मंत्र
40
अध्याय

सामवेद

संगीत का वेद। ऋग्वेद के मंत्रों को संगीतमय रूप में प्रस्तुत करता है। भारतीय संगीत का मूल स्रोत। गायन विधि के मंत्र।

1,875
मंत्र
2
भाग

अथर्ववेद

विज्ञान का वेद। आयुर्वेद, ज्योतिष, रत्न विज्ञान, वास्तु और तंत्र का स्रोत। रोग निवारण और कल्याण के मंत्र।

5,987
मंत्र
20
काण्ड

प्रमुख वैदिक मंत्र

गायत्री मंत्र (ऋग्वेद 3.62.10)

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं
भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्
वेद
ऋग्वेद (तृतीय मण्डल)
ऋषि
विश्वामित्र
देवता
सविता (सूर्य देव)
छन्द
गायत्री (24 अक्षर)
अर्थ: हम उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, तेजस्वी, पूज्य, दिव्य प्रकाश को धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करे।

अन्य महत्वपूर्ण वैदिक मंत्र

महामृत्युंजय मंत्र

ऋग्वेद
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्

मृत्यु पर विजय दिलाने वाला मंत्र, आरोग्य और दीर्घायु प्रदान करता है। शिव जी को समर्पित।

स्वास्थ्य • दीर्घायु सुनें

शांति पाठ मंत्र

यजुर्वेद
ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः
पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः

सभी दिशाओं में शांति की कामना करने वाला मंत्र। वैदिक अनुष्ठानों का समापन मंत्र।

शांति • शुभकामना सुनें

पवमान सूक्त

सामवेद
पवमानः सुवर्जनः सुमित्रः सुप्रणीतिभिः
अग्ने याहि दिवः सप्त होतारं त्वा वृणीमहे

अग्नि देवता को समर्पित मंत्र। पवित्रता और शुद्धि प्रदान करने वाला। यज्ञ में प्रयोग।

शुद्धि • यज्ञ सुनें

भद्रा कारत् मंत्र

अथर्ववेद
भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवाः
भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः

कल्याण और मंगल की कामना करने वाला मंत्र। सभी इन्द्रियों के कल्याण के लिए।

कल्याण • मंगल सुनें

वैदिक मंत्र जप की विधि

उच्चारण गाइड

वैदिक मंत्रों का सही उच्चारण अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहाँ कुछ मूलभूत नियम:

OM
ओऽम् (तीन अक्षरों का सम्मिलन)
Ḥ (Visarga)
ह का हल्का उच्चारण, श्वास के साथ
Ṃ (Anusvara)
नाक से ध्वनि, अर्ध नासिक्य
' (Avagraha)
लोप का चिह्न, विराम
जप के नियम:
  • प्रातः ब्रह्म मुहूर्त (4-6 बजे) सबसे उत्तम समय
  • उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें
  • मंत्र का उच्चारण स्पष्ट और धीमी आवाज़ में करें
  • मन को मंत्र के अर्थ पर केंद्रित करें
  • शुरुआत में 11, 21 या 108 बार जप करें

वैदिक मंत्रों के लाभ

  • मानसिक शांति: तनाव और चिंता दूर करते हैं
  • शारीरिक स्वास्थ्य: रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं
  • आध्यात्मिक विकास: चेतना के उच्च स्तर तक पहुँचाते हैं
  • वातावरण शुद्धि: नकारात्मक ऊर्जा दूर करते हैं
  • कर्म शोधन: पिछले जन्मों के कर्मों का प्रभाव कम करते हैं
  • एकाग्रता: मन की एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ाते हैं
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