श्रीकृष्ण - मुरलीधर

नटखट नंदलाल, गोविंद, गोपाल, वासुदेव - भगवद गीता, कृष्ण मंत्र, रासलीला कथा और कृष्ण भजन

भगवान श्रीकृष्ण - मुरलीधर, नटखट नंदलाल, गोविंद, गोपाल, वासुदेव। भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण ने अपनी लीलाओं, प्रेम, ज्ञान और करुणा से विश्व को मोहित किया। वे महाभारत के सारथी और भगवद गीता के उपदेशक थे।

श्रीकृष्ण का महत्व

श्रीकृष्ण प्रेम, करुणा, ज्ञान और लीला के साक्षात स्वरूप हैं। उन्होंने भगवद गीता में जो ज्ञान दिया, वह आज भी मानवता का मार्गदर्शन कर रहा है। बाललीला, रासलीला, माखनचोरी, गोवर्धन पर्वत धारण, कंस वध, महाभारत में सारथ्य और अंत में गीता का उपदेश - उनका संपूर्ण जीवन अनुपम है।

"यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥"

— श्रीमद्भगवद गीता 4.7

श्रीकृष्ण के गुण और विशेषताएँ

मुरलीधर

बांसुरी धारण करने वाले, संगीत और कला के प्रेमी, प्रेम के देवता

मोरमुकुटधारी

मोर पंख का मुकुट धारण करने वाले, प्रकृति के साथ एकात्म के प्रतीक

माखनचोर

बाललीला में माखन चुराने वाले, भक्तों के हृदय से प्रेम चुराने वाले

पार्थ सारथी

अर्जुन के सारथी, ज्ञान और कर्मयोग के उपदेशक, मार्गदर्शक

श्रीमद्भगवद गीता

गीता का प्रथम श्लोक

धृतराष्ट्र उवाच।
धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः।
मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय॥
अर्थ: धृतराष्ट्र ने पूछा - हे संजय! धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र में युद्ध की इच्छा से एकत्र हुए मेरे और पांडवों के पुत्रों ने क्या किया?

श्रीकृष्ण भक्ति संसाधन

भगवद गीता

श्रीकृष्ण के मुख से निकला ज्ञान का अमृत। 18 अध्यायों में जीवन दर्शन।

18 अध्याय देखें

कृष्ण मंत्र

कृष्ण के विभिन्न मंत्र - गोविंद मंत्र, गोपाल मंत्र, कृष्ण गायत्री आदि।

शक्तिशाली मंत्र देखें

रासलीला कथा

गोपियों के साथ महारास की दिव्य लीला। प्रेम और भक्ति का चरमोत्कर्ष।

भागवत कथा देखें

कृष्ण भजन

मुरली मनोहर के भजनों का संग्रह। कान्हा के मधुर गीत।

60+ भजन देखें

श्रीकृष्ण की प्रमुख लीलाएँ

जन्म लीला
कारागार में जन्म, वासुदेव द्वारा गोकुल पहुंचाना
माखन चोरी
नटखट बाललीला, माखन चुराना
कालिया नाग
कालिया नाग का दमन, यमुना में नृत्य
गोवर्धन पूजा
गोवर्धन पर्वत धारण, इंद्र का मान भंग
रासलीला
गोपियों के साथ महारास, प्रेम की पराकाष्ठा
कंस वध
मथुरा आगमन, कंस का संहार
सारथ्य
महाभारत में अर्जुन के सारथी, गीता का उपदेश
द्वारका लीला
द्वारका नगरी की स्थापना, राजधर्म

श्रीकृष्ण मंत्र - पूरा विवरण

हरे कृष्ण महामंत्र
हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे॥
मंत्र का अर्थ
हे हरे (ह्लादिनी शक्ति), हे कृष्ण, हे राम (आनंद के सागर)! मुझे अपनी भक्ति में नियोजित करें। यह महामंत्र कलियुग में सबसे सरल और प्रभावी साधना है।
मंत्र के लाभ
  • मानसिक शांति और आनंद की अनुभूति
  • भौतिक बंधनों से मुक्ति
  • प्रेम और करुणा का विकास
  • सभी प्रकार के पापों का नाश
  • आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष में सहायक
  • भय और चिंता से मुक्ति
कृष्ण गायत्री मंत्र
ॐ देवकीनन्दनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि।
तन्नो कृष्णः प्रचोदयात्॥
मंत्र का अर्थ
"ॐ, हम देवकी नंदन श्रीकृष्ण का ध्यान करते हैं। हम वासुदेव को अपनी बुद्धि में धारण करते हैं। वे भगवान कृष्ण हमारी बुद्धि को प्रकाशित करें।"
मंत्र के लाभ
  • बुद्धि, ज्ञान और विवेक में वृद्धि
  • भक्ति और प्रेम की भावना जागृत होती है
  • सांसारिक बंधनों से मुक्ति
  • मन की शांति और एकाग्रता में वृद्धि
  • आध्यात्मिक शक्ति का संचार
  • जीवन के संकटों से मुक्ति
गोविंद मंत्र
ॐ गोविंदाय नमः॥
मंत्र का अर्थ
"ॐ, मैं गोविंद (गोपाल, गायों के स्वामी) श्रीकृष्ण को नमन करता हूँ।" यह सरल मंत्र कृष्ण की कृपा प्राप्त करने का सबसे सरल माध्यम है।
मंत्र के लाभ
  • सभी प्रकार के सुख-समृद्धि की प्राप्ति
  • प्रेम, करुणा और सौंदर्य की अनुभूति
  • मानसिक शांति और स्थिरता
  • जीवन के हर क्षेत्र में सफलता
  • भय और संकट से मुक्ति
  • आध्यात्मिक उन्नति में सहायक

अन्य कृष्ण मंत्र

मूल मंत्र

बीज मंत्र
ॐ क्लीं कृष्णाय नमः॥

कामबीज सहित कृष्ण मंत्र। आकर्षण और प्रेम में वृद्धि के लिए।

प्रेम • आकर्षण सुनें

अष्टाक्षर मंत्र

आठ अक्षर
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥

आठ अक्षरों का मंत्र। सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला।

मोक्ष • सिद्धि सुनें

गोपाल मंत्र

बाल स्वरूप
ॐ गोपालाय नमः॥

बालकृष्ण का स्मरण। सरल और प्रभावी।

बालरूप • ममता सुनें

कृष्ण भजन प्लेलिस्ट

श्रीकृष्ण के मधुर भजनों की विशेष प्लेलिस्ट। एक बार प्ले करें और 4 घंटे तक निर्बाध कृष्ण भजन सुनें।

कुल 45 भजन • 4 घंटे • 20K+ लाइक्स

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श्रीकृष्ण पूजा विधि

समय
जन्माष्टमी, बुधवार
प्रातः काल या रात्रि (जन्म के समय) पूजा शुभ
स्नान/अभिषेक
जल, पंचामृत, दूध
बालकृष्ण की मूर्ति का पंचामृत से अभिषेक
पुष्प
तुलसी दल, पीले पुष्प
तुलसी दल अति प्रिय, पीले और नीले पुष्प
प्रसाद
माखन-मिश्री, पंचामृत
माखन-मिश्री, मोहनभोग, पंचामृत
विशेष सलाह:
  • श्रीकृष्ण की बाल रूप या मुरलीधर मूर्ति स्थापित करें। राधा-कृष्ण युगल रूप में पूजा विशेष फलदायी।
  • तुलसी दल अवश्य चढ़ाएं। श्रीकृष्ण को तुलसी अति प्रिय है।
  • माखन-मिश्री और पंचामृत का भोग लगाएं।
  • भगवद गीता का पाठ करें या सुनें।
  • हरे कृष्ण महामंत्र का जाप करें। 108 बार जाप लाभकारी।
  • जन्माष्टमी पर रात्रि 12 बजे विशेष पूजा करें और आरती करें।

कृष्ण भक्ति के लाभ

  • प्रेम और करुणा: हृदय में प्रेम और करुणा का विकास
  • मानसिक शांति: मन की अशांति दूर होती है और आनंद की अनुभूति होती है
  • भय मुक्ति: सभी प्रकार के भय और चिंता से मुक्ति
  • समृद्धि और ऐश्वर्य: घर में सुख-समृद्धि और धन का आगमन
  • मोक्ष प्राप्ति: जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति में सहायक
  • आध्यात्मिक उन्नति: आध्यात्मिक पथ पर अग्रसर होने में सहायक
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