नवरात्रि में कौन से मंत्र जाप करें? माँ दुर्गा के शक्तिशाली मंत्र

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
नवरात्रि के पावन अवसर पर माँ दुर्गा के मंत्रों का जाप

नवरात्रि के नौ दिन माँ दुर्गा की आराधना को समर्पित हैं। यह समय मंत्र जाप और साधना के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इस अवधि में किए गए मंत्र जाप का विशेष फल होता है। आइए जानते हैं नवरात्रि में किन मंत्रों का जाप करना चाहिए, उनकी विधि, समय और लाभ।

नवरात्रि में जाप के लिए प्रमुख मंत्र

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
यह माँ दुर्गा का सर्वशक्तिशाली बीज मंत्र है। नवरात्रि में इस मंत्र का 108 बार जाप करने से सभी प्रकार के संकट दूर होते हैं।

ॐ दुं दुर्गायै नमः

ॐ दुं दुर्गायै नमः
माँ दुर्गा का मूल मंत्र। नवरात्रि में प्रतिदिन 108 बार जाप करें।

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं
त्रि-बीज मंत्र, तीनों देवियों (सरस्वती, लक्ष्मी, काली) का सम्मिलित मंत्र।

ॐ सर्वमंगल मांगल्ये

ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते
नवरात्रि में प्रतिदिन इस मंत्र का जाप करें।

नवदुर्गा के 9 रूपों के मंत्र

दिनमाँ का स्वरूपमंत्र
प्रथमशैलपुत्रीॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः
द्वितीयब्रह्मचारिणीॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः
तृतीयचंद्रघंटाॐ देवी चंद्रघंटायै नमः
चतुर्थकूष्मांडाॐ देवी कूष्मांडायै नमः
पंचमस्कंदमाताॐ देवी स्कंदमातायै नमः
षष्ठमकात्यायनीॐ देवी कात्यायन्यै नमः
सप्तमकालरात्रिॐ देवी कालरात्र्यै नमः
अष्टमीमहागौरीॐ देवी महागौर्यै नमः
नवमीसिद्धिदात्रीॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः

दुर्गा सप्तशती पाठ का महत्व

नवरात्रि के नौ दिनों में दुर्गा सप्तशती (जिसे चंडी पाठ या देवी महात्म्य भी कहा जाता है) का पाठ अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह मार्कण्डेय पुराण का अंश है और इसमें माँ दुर्गा की महिमा का वर्णन है। इसके 13 अध्याय हैं।

नवरात्रि के पहले तीन दिन प्रथम चरित्र (अध्याय 1-3), अगले तीन दिन मध्यम चरित्र (अध्याय 4-8) और अंतिम तीन दिन उत्तम चरित्र (अध्याय 9-13) का पाठ करना चाहिए। पूरे नौ दिनों में सम्पूर्ण दुर्गा सप्तशती का पाठ करना सबसे उत्तम है।

दुर्गा सप्तशती के पाठ से सभी प्रकार के भय, रोग और शत्रुओं का नाश होता है। यह साधक को आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है और मनोवांछित फल देता है।

नवरात्रि में मंत्र जाप की विधि

1

समय और स्थान

प्रातः ब्रह्म मुहूर्त (4-6 बजे) सर्वोत्तम है। स्वच्छ स्थान पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।

2

शुद्धता और आसन

स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। लाल, पीला या सफेद वस्त्र शुभ माने जाते हैं। कुशा या ऊनी आसन का प्रयोग करें।

3

माला और संख्या

रुद्राक्ष या कमलगट्टे की माला का प्रयोग करें। प्रत्येक मंत्र को कम से कम 108 बार (एक माला) जपें।

4

संकल्प और समर्पण

जाप शुरू करने से पहले संकल्प लें और जाप के अंत में माँ दुर्गा को समर्पित करें।

नवरात्रि में मंत्र जाप के लाभ

लाभ का प्रकारप्रभाव
आध्यात्मिकआत्मशुद्धि, आध्यात्मिक उन्नति, माँ दुर्गा की कृपा
मानसिकमानसिक शांति, तनाव मुक्ति, आत्मविश्वास में वृद्धि
शारीरिकरोग निवारण, नेत्र ज्योति में वृद्धि, ऊर्जा का संचार
सांसारिकधन-धान्य की वृद्धि, शत्रु नाश, संकटों से मुक्ति

नवरात्रि मंत्र जाप के नियम

  • शुद्धता: जाप के दौरान शरीर और मन की शुद्धता का ध्यान रखें। सात्विक भोजन करें, लहसुन-प्याज का त्याग करें।
  • एकाग्रता: मंत्र जाप करते समय मन को एकाग्र रखें। माँ दुर्गा के स्वरूप का ध्यान करें।
  • नियमितता: नवरात्रि के 9 दिनों में प्रतिदिन नियमित रूप से जाप करें।
  • उच्चारण शुद्धि: मंत्रों का शुद्ध उच्चारण अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि उच्चारण में संदेह हो तो किसी विद्वान से सीखें।
  • दान: जाप के बाद यथाशक्ति ब्राह्मणों या गरीबों को भोजन या वस्त्र का दान करें।

नवरात्रि मंत्र जाप का नैतिक संदेश

मंत्र जाप की सीख
  • मंत्र जाप से मन शुद्ध होता है और आत्मबल बढ़ता है
  • नियमित साधना से आध्यात्मिक उन्नति होती है
  • श्रद्धा और विश्वास ही सच्ची साधना का आधार है
  • नवरात्रि का समय मंत्र साधना के लिए सर्वोत्तम है

नवरात्रि मंत्र जाप से जुड़े सवाल

1. क्या नवरात्रि में कोई भी मंत्र जाप कर सकता है?

हाँ, कोई भी व्यक्ति नवरात्रि में माँ दुर्गा के मंत्रों का जाप कर सकता है। इसमें कोई जाति, लिंग या आयु का बंधन नहीं है। मंत्र के प्रति श्रद्धा और उच्चारण की शुद्धता आवश्यक है। महिलाएं भी पूरे अधिकार से मंत्र जाप कर सकती हैं।

2. दुर्गा सप्तशती का पाठ कितनी बार करना चाहिए?

नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ एक बार पूर्ण रूप से करना अत्यंत फलदायी है। यदि समय कम हो तो प्रतिदिन एक अध्याय का पाठ भी लाभकारी है। कुछ लोग नवरात्रि के नौ दिनों में पूरी दुर्गा सप्तशती का 3, 5 या 11 बार पाठ करते हैं।

3. क्या बिना माला के भी मंत्र जाप किया जा सकता है?

हाँ, बिना माला के भी मंत्र जाप किया जा सकता है। आप मानसिक जाप (मन ही मन) या वाचिक जाप कर सकते हैं। माला का प्रयोग जाप की संख्या की गणना के लिए होता है, यह अनिवार्य नहीं है। परंतु रुद्राक्ष या कमलगट्टे की माला से जाप करना अधिक लाभकारी माना जाता है।

4. क्या नवरात्रि में मंत्र जाप के दौरान कोई विशेष नियम है?

हाँ, मंत्र जाप के दौरान कुछ नियमों का पालन करना चाहिए:

  • जाप के दौरान मन को एकाग्र रखें
  • शुद्ध आसन पर बैठें
  • जाप से पूर्व स्नान करें
  • लहसुन-प्याज, मांस-मदिरा का त्याग करें
  • जाप के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करें
  • जाप के बाद माँ दुर्गा को जल अर्पित करें
"या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥"

(जो देवी सभी प्राणियों में माता के रूप में विद्यमान हैं, उन्हें मेरा नमस्कार है।)

नोट: नवरात्रि के पावन अवसर पर श्रद्धा और भक्ति के साथ मंत्र जाप करें। यदि पूरे 9 दिन जाप करना संभव न हो तो कम से कम प्रतिपदा, अष्टमी और नवमी को अवश्य मंत्र जाप करें। माँ दुर्गा की कृपा से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

लेखक: आचार्य शक्ति प्रसाद

दुर्गा सप्तशती और मंत्र विज्ञान के विद्वान, 25+ वर्षों से नवरात्रि साधना और मंत्र जाप पर शोध। उनके व्याख्यान श्रद्धालुओं में अत्यंत लोकप्रिय हैं।

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