सूर्य देव को आदित्य, भास्कर, दिनकर आदि नामों से जाना जाता है। वे प्रत्यक्ष देवता हैं और जगत की आत्मा हैं। सूर्य आरती का नियमित पाठ करने से आरोग्य, कीर्ति, आयु और सफलता की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन इस आरती का विशेष महत्व है। सूर्य को अर्घ्य देने के बाद सूर्य आरती करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
॥ आरती श्री सूर्य देव की ॥
(आदित्य सूर्य नारायण)
ॐ जय सूर्य भगवान, स्वामी जय सूर्य भगवान।
दुःख-दरिद्र मिटाने, सुख-सम्पत्ति दाता जग की आन॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
सप्त अश्व रथ साजे, लाल किरण समान।
अरुण मातल संचालक, दिनकर भगवान॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
बारह नाम तुम्हारे, करते प्रकाश महान।
मिटते पाप अनेकों, जपते जो नाम॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
रविवार व्रत करते, जो नर-नारी जान।
संकट सब मिट जाते, मिले सुख सम्मान॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
आदित्य सूर्य नारायण, जय जय सूर्य भगवान।
नेत्र रोग मिटाने, देते आरोग्य दान॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
छाया और संज्ञा से, पुत्र-पुत्री पाई।
शनि देव भ्राता तुम्हारे, यमुना बहन कहलाई॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
ताँबे के जल से तुम्हें, अर्घ्य जो कोई देता।
उसके सब कष्ट मिटाते, सुख सम्पत्ति देता॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
लाल पुष्प चढ़ा कर, लाल चन्दन लगाता।
मीठा मिश्री भोग लगा कर, प्रसाद सबको खिलाता॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
सूर्य आरती के लाभ
आरोग्य लाभ
सूर्य आरती के नियमित पाठ से नेत्र रोग, हृदय रोग और त्वचा रोग दूर होते हैं।
शनि दोष निवारण
सूर्य आरती के प्रभाव से शनि दोष और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
मान-सम्मान
सूर्य आरती करने से समाज में मान-सम्मान और यश की प्राप्ति होती है।
मनोकामना सिद्धि
सच्चे मन से की गई सूर्य आरती से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
सूर्य आरती का सही समय और विधि
सूर्योदय काल
सूर्योदय के समय सूर्य को अर्घ्य देने के बाद सूर्य आरती का विशेष महत्व है।
रविवार
सूर्य देव का दिन, इस दिन आरती का पाठ अत्यंत फलदायी होता है।
संक्रांति
मकर संक्रांति और मेष संक्रांति के दिन सूर्य आरती का विशेष महत्व है।
छठ पूजा
छठ पर्व के अवसर पर सूर्य आरती का विशेष महत्व होता है।
आरती विधि
- स्नान और शुद्धता: आरती से पूर्व स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। लाल रंग के वस्त्र विशेष शुभ माने जाते हैं।
- सूर्य अर्घ्य: सर्वप्रथम ताँबे के लोटे में जल, लाल चन्दन, अक्षत, लाल पुष्प डालकर सूर्य को अर्घ्य दें।
- दीपक जलाएं: घी का दीपक जलाकर सूर्य देव के चित्र या प्रतीक के समक्ष रखें।
- ध्यान करें: सूर्य देव का ध्यान करें - सप्त अश्व रथ पर आरूढ़, प्रकाशमान स्वरूप।
- आरती गाएं: श्रद्धा और भक्ति भाव से सूर्य आरती का पाठ करें या गाएं।
- घंटी बजाएं: आरती के दौरान घंटी बजाते रहें।
- प्रसाद चढ़ाएं: सूर्य देव को मिश्री, गुड़, लाल रंग की मिठाई या गेहूं से बने पदार्थों का भोग लगाएं।
- आरती के बाद: आरती के बाद हाथों को आरती के ऊपर से ले जाकर सिर पर फेरें और प्रसाद ग्रहण करें।
सूर्य आरती से जुड़ी विशेष बातें
- सूर्य आरती के बाद आदित्य हृदय स्तोत्र या सूर्य चालीसा का पाठ करना अत्यंत लाभकारी होता है।
- रविवार के दिन प्रतिदिन सूर्य आरती का पाठ करना चाहिए।
- सूर्य आरती का पाठ करते समय लाल रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है।
- सूर्य ग्रहण के समय सूर्य आरती न करें, ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान करके आरती करें।
"आदित्य सूर्य नारायण, जय जय सूर्य भगवान। नेत्र रोग मिटाने, देते आरोग्य दान॥"
अन्य प्रमुख आरतियां
गणेश आरती
श्री गणेश जी की आरती, विघ्नहर्ता की महिमा
लक्ष्मी आरती
धन की देवी की आरती, समृद्धि प्रदायिनी
शिव आरती
भोलेनाथ की आरती, जय शिव ओंकारा
विष्णु आरती
नारायण की आरती, ॐ जय जगदीश हरे
दुर्गा आरती
आदि शक्ति की आरती, जय अम्बे गौरी
हनुमान आरती
संकटमोचन की आरती, बजरंगबली
भक्ति के प्रकार
पूजा विधि
सही पूजा विधि, सामग्री, मंत्र और विधिवत पूजन। दैनिक पूजा से लेकर विशेष पूजा तक की पूरी जानकारी।
आरती संग्रह
सभी देवी-देवताओं की आरती, आरती का महत्व, सही समय और विधि। संपूर्ण आरती संग्रह।
व्रत और उपवास
विभिन्न व्रतों की विधि, महत्व, कथाएं और फल। एकादशी, पूर्णिमा, संक्रांति विशेष व्रत।
भक्ति कथाएं
प्रेरक भक्ति कथाएं, संतों की कहानियां, देवताओं के लीलाएं और आध्यात्मिक अनुभव।